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मधुरेंद्र कुमार

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"मधुरेंद्र कुमार" redirects here. For other uses, see मधुरेंद्र कुमार (disambiguation).
मधुरेंद्र कुमार
मधुरेंद्र कुमार
मधुरेंद्र कुमार
Born 5 सितंबर 1994
Birthplace पूर्वी चम्पारण, बिहार, भारत
Nationality भारतीय
Occupation रेत कलाकार, मूर्तिकार, चित्रकार, बहु-माध्यम कलाकार
Education महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी से मूर्तिकला में BFA और MFA
KnownFor रेत कला, पर्यावरण संरक्षण, मतदाता जागरूकता, महिला सशक्तिकरण, नशामुक्ति, स्वच्छता, जल संरक्षण और विश्व शांति
Awards 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार, 100 से अधिक राष्ट्रीय सम्मान और अनेक विश्व रिकॉर्ड
Achievements 25 से अधिक देशों में 75 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारत का प्रतिनिधित्व
Born 5 सितंबर 1994, पूर्वी चम्पारण, बिहार, भारत
Spouse Not specified

मधुरेंद्र कुमार: रेत से विश्व मंच तक

एक संघर्षशील बालक से विश्वप्रसिद्ध भारतीय रेत कलाकार बनने की प्रेरक यात्रा

मधुरेंद्र कुमार भारत के प्रसिद्ध रेत कलाकार, मूर्तिकार, चित्रकार, लीफ आर्टिस्ट और बहु-माध्यम कलाकार हैं। वे अपनी विशाल, जटिल और सामाजिक संदेशों से भरपूर कलाकृतियों के लिए भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अनेक देशों में पहचाने जाते हैं।

उन्होंने रेत को केवल कला का माध्यम नहीं बनाया, बल्कि उसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, मतदाता जागरूकता, महिला सशक्तिकरण, विश्व शांति, नशामुक्ति, स्वच्छता, जल संरक्षण, मानवाधिकार और राष्ट्रीय एकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को समाज के सामने प्रस्तुत किया।

उपलब्ध विवरणों के अनुसार, मधुरेंद्र कुमार अब तक 25 से अधिक देशों में आयोजित 75 से अधिक अंतरराष्ट्रीय कला महोत्सवों और प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उन्हें 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार, 100 से अधिक राष्ट्रीय सम्मान और अनेक विश्व रिकॉर्ड प्राप्त हुए हैं। रेत कला के साथ-साथ उन्होंने हरी पत्तियों, फलों, सब्जियों, अनाज, मिट्टी, धातु, पत्थर और पुनर्चक्रित वस्तुओं पर भी अपनी असाधारण कला का प्रदर्शन किया है।

उनकी कला का मूल सिद्धांत है—

“कला केवल सजावट या मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और मानवता की सेवा करने के लिए होनी चाहिए।”


संक्षिप्त परिचय

पूरा नाम: मधुरेंद्र कुमार
पहचान: भारतीय रेत कलाकार, मूर्तिकार, चित्रकार, लीफ आर्टिस्ट एवं बहु-माध्यम कलाकार
जन्म तिथि: 5 सितंबर 1994
जन्म स्थान: बरवाकला, घोड़ासहन, पूर्वी चम्पारण, बिहार
पैतृक गांव: बिजबनी, बनकटवा, पूर्वी चम्पारण, बिहार
पिता: श्री शिवकुमार साह
माता: श्रीमती गेना देवी
दादा: स्वर्गीय रामचंद्र साह
दादी: स्वर्गीय फूला देवी
पत्नी: दीपिका कुमारी
संतान: दो बच्चे
शिक्षा: बीएफए एवं एमएफए, मूर्तिकला
विश्वविद्यालय: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
मानद उपाधि: अमेरिका इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, हॉलीवुड, कैलिफोर्निया द्वारा मानद डॉक्टरेट, 2026
राष्ट्रीय सम्मान: 100 से अधिक
अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार: 50 से अधिक
अंतरराष्ट्रीय भागीदारी: 25 से अधिक देश और 75 से अधिक अंतरराष्ट्रीय आयोजन
विश्व रिकॉर्ड: उनके परिचय में 12 से अधिक विश्व रिकॉर्ड का उल्लेख किया गया है
विशेष क्षेत्र: सैंड आर्ट, लीफ आर्ट, मूर्तिकला, फल एवं सब्जी नक्काशी, सामाजिक और पर्यावरणीय कला


जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

मधुरेंद्र कुमार का जन्म 5 सितंबर 1994 को बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले के घोड़ासहन प्रखंड स्थित बरवाकला गांव में हुआ। बरवाकला उनका ननिहाल है, जबकि उनका पैतृक गांव बिजबनी, बनकटवा में स्थित है।

वे एक साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर कानू परिवार में जन्मे। उनके पिता श्री शिवकुमार साह एक सामान्य किसान हैं, जिन्होंने खेती और मेहनत-मजदूरी के सहारे परिवार का पालन-पोषण किया। उनकी माता श्रीमती गेना देवी एक गृहिणी हैं। वे क्षेत्रीय लोकगीत गायन, ऊनी स्वेटर बुनाई और पारंपरिक सिक्की कला में भी रुचि रखती हैं।

उनके दादा स्वर्गीय रामचंद्र साह एक गरीब किसान थे। परिवार की आय बढ़ाने के लिए वे स्थानीय मेलों और बाजारों में झाल-मूढ़ी तथा मिठाइयां भी बेचा करते थे। उनकी दादी स्वर्गीय फूला देवी एक गृहिणी थीं।

परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। घर में सीमित साधन थे और नियमित शिक्षा प्राप्त करना आसान नहीं था। लेकिन कठिन परिस्थितियों ने मधुरेंद्र के भीतर मेहनत, धैर्य और संघर्ष की ऐसी भावना पैदा की, जिसने आगे चलकर उनके जीवन की दिशा बदल दी।


बचपन में दिखाई देने लगी थी कला की प्रतिभा

मधुरेंद्र कुमार की कला के प्रति रुचि बहुत कम उम्र में दिखाई देने लगी थी। बताया जाता है कि जब वे लगभग तीन वर्ष के थे, तब उनके दादा उन्हें स्लेट पर पढ़ाने बैठाते थे। लेकिन अक्षर लिखने के स्थान पर मधुरेंद्र मिट्टी या स्लेट पर हंस, बत्तख और अन्य आकृतियां बनाने लगते थे।

उनकी प्रतिभा देखकर उनके दादा रामचंद्र साह ने कहा था—

“यह बच्चा बड़ा होकर एक दिन बहुत बड़ा कलाकार बनेगा।”

बचपन में मधुरेंद्र को परिवार की सहायता के लिए भैंस और बकरियां चराने जाना पड़ता था। जब वे पशुओं को चराने के लिए अरुणा नदी के किनारे जाते, तब वहां की प्राकृतिक बालू से छोटे-छोटे घर, चेहरे, पशु-पक्षी और मूर्तियां बनाया करते थे।

उसी नदी किनारे अनजाने में उनके भीतर के रेत कलाकार का जन्म हुआ।


वर्ष 1998 की बाढ़ और रेत कला की शुरुआती प्रेरणा

बिहार में रेत कला के विकास से जुड़ी उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, वर्ष 1998 में पूर्वी चम्पारण क्षेत्र में भीषण बाढ़ आई थी। उस समय लगभग पांच वर्ष के मधुरेंद्र कुमार ने अरुणा नदी के किनारे बालू से भगवान इंद्र की आकृति बनाई और वर्षा रुकने की प्रार्थना की।

इस घटना को उनके रेत कला अभ्यास की शुरुआती प्रेरणाओं में से एक माना जाता है।

बिहार एक स्थलरुद्ध राज्य है और यहां समुद्री तट नहीं हैं। इसलिए मधुरेंद्र ने समुद्र तट की रेत के स्थान पर बिहार की नदियों के किनारे मिलने वाली बालू को अपनी कला का माध्यम बनाया। आगे चलकर उन्होंने गंगा, गंडक, कोसी, सोन, बागमती और अरुणा जैसी नदियों के तटों पर अनेक विशाल रेत कलाकृतियां बनाईं।


गरीबी और संघर्ष से भरा बचपन

मधुरेंद्र कुमार का बचपन आर्थिक अभावों में बीता। लगभग सात वर्ष की उम्र से ही उन्होंने अपनी पढ़ाई और दैनिक आवश्यकताओं के लिए छोटे-मोटे काम करने शुरू कर दिए थे।

उन्होंने—

  • घर-घर जाकर दही बेचा।

  • बांस की डलिया, छैंटी और टोकरियां बुनीं।

  • बाजारों में हरी सब्जियां बेचीं।

  • स्थानीय मेलों और त्योहारों में झाल-मूढ़ी बेची।

  • होटलों में काम किया।

  • मकानों और दुकानों की पेंटिंग की।

  • साइन बोर्ड और लेटर राइटिंग का काम किया।

  • चित्रकारी करके पैसे कमाए।

  • नाइट गार्ड के रूप में काम किया।

  • सिलाई सेंटर पर कपड़ों में काज और बटन लगाने का काम किया।

  • निजी कंपनियों के लिए घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया।

इन सभी कार्यों के साथ उन्होंने अपनी कला साधना जारी रखी।

कई बार उनके पास रंग, ब्रश और अन्य कला सामग्री खरीदने के लिए भी पैसे नहीं होते थे। ऐसे समय में नदी की रेत उनके लिए सबसे सुलभ कैनवास बन गई। रेत के लिए न तो उन्हें महंगी सामग्री खरीदनी पड़ती थी और न ही किसी बड़े स्टूडियो की आवश्यकता थी।


परिवार से मतभेद और कला के प्रति समर्पण

मधुरेंद्र के माता-पिता चाहते थे कि वे खेती करें या किसी स्थायी सरकारी नौकरी की तैयारी करें। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उनकी चिंता स्वाभाविक थी। लेकिन मधुरेंद्र का मन पूरी तरह कला में लगता था।

कला को अपना जीवन बनाने के निर्णय के कारण किशोरावस्था में उन्हें पारिवारिक असहमति का सामना करना पड़ा। कुछ समय तक उन्हें परिवार से अलग रहना पड़ा। उन्होंने श्रम और छोटे-मोटे कार्यों से अपना जीवन चलाया, लेकिन कला का अभ्यास नहीं छोड़ा।

यही संघर्ष आगे चलकर उनकी पहचान बना। उन्होंने साबित किया कि सीमित संसाधनों के बावजूद लगातार मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है।


शिक्षा

मधुरेंद्र कुमार की शुरुआती शिक्षा उनके पैतृक क्षेत्र पूर्वी चम्पारण में हुई। आर्थिक कठिनाइयों के कारण उनकी स्कूली शिक्षा नियमित नहीं रह सकी। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी।

बाद में उन्होंने वाराणसी स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मूर्तिकला में फाइन आर्ट्स की पढ़ाई की।

उन्होंने—

  • बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स, बीएफए इन स्कल्पचर

  • मास्टर ऑफ फाइन आर्ट्स, एमएफए इन स्कल्पचर

की डिग्रियां प्राप्त कीं।

कॉलेज के दिनों में भी उनकी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी। बताया जाता है कि हॉस्टल की फीस न दे पाने के कारण उन्हें लगभग छह महीनों तक कॉलेज के बरामदे में सोकर रातें बितानी पड़ीं।

इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और मूर्तिकला की तकनीकों में औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

वर्ष 2026 में उपलब्ध विवरणों के अनुसार, अमेरिका इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, हॉलीवुड, कैलिफोर्निया ने उन्हें कला और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट प्रदान की।


डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से मिला प्रोत्साहन

मधुरेंद्र कुमार के जीवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की भूमिका विशेष रूप से प्रेरणादायक रही।

वर्ष 2005 में मधुरेंद्र ने “सर्वधर्म शहादत” और राष्ट्रीय एकता के विषय पर एक विशाल रेत कलाकृति तैयार की थी। आगे चलकर उनकी कला की चर्चा डॉ. कलाम तक पहुंची।

वर्ष 2012 में मधुरेंद्र कुमार ने “विकसित भारत के निर्माण में विज्ञान का महत्व” विषय पर एक कैनवास पेंटिंग तैयार की। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने उनकी पेंटिंग की सराहना की और उन्हें सम्मानित किया।

मधुरेंद्र कुमार ने अनेक अवसरों पर बताया है कि जिस समय समाज और परिवार के कई लोग उनके कला-क्षेत्र में आगे बढ़ने के निर्णय से सहमत नहीं थे, उस समय डॉ. कलाम के प्रोत्साहन ने उन्हें नई ऊर्जा दी।

डॉ. कलाम की सराहना उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ बनी। इससे मधुरेंद्र को विश्वास हुआ कि उनकी कला केवल व्यक्तिगत रुचि नहीं, बल्कि समाज और देश के लिए उपयोगी माध्यम बन सकती है।


कलाकार के रूप में पहचान

मधुरेंद्र कुमार आधुनिक भारतीय कला के उन कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने रेत कला को सामाजिक संदेश और जन-जागरूकता से जोड़ा।

वे केवल सैंड आर्टिस्ट नहीं हैं। वे मूर्तिकार, चित्रकार, लीफ आर्टिस्ट, पोर्ट्रेट कलाकार, सूक्ष्म नक्काशी कलाकार और बहु-माध्यम कलाकार भी हैं।

उनकी पहचान विशेष रूप से इन कारणों से बनी—

  • विशाल और जटिल रेत मूर्तियां।

  • सामाजिक और पर्यावरणीय विषय।

  • हरी पत्तियों पर सूक्ष्म नक्काशी।

  • फल और सब्जियों पर माइक्रो-कार्विंग।

  • अनुपयोगी वस्तुओं से पुनर्चक्रण आधारित कला।

  • महापुरुषों और ऐतिहासिक व्यक्तियों की स्थायी मूर्तियां।

  • सरकारी और सामाजिक अभियानों के लिए जन-जागरूकता कलाकृतियां।

  • भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं का कलात्मक प्रदर्शन।


कला की तकनीक और सिद्धांत

मधुरेंद्र कुमार की कला में यथार्थवाद, सूक्ष्म शिल्पकला, नवाचार, पुनर्चक्रण और सामाजिक चेतना का मेल दिखाई देता है।

वे किसी चेहरे, घटना या विचार को इस प्रकार प्रस्तुत करते हैं कि सामान्य दर्शक भी कलाकृति के संदेश को आसानी से समझ सके।

उनकी कला का प्रमुख सिद्धांत है—

“कला समाज के लिए”

इस सिद्धांत के अंतर्गत उनकी कलाकृतियों में चार प्रमुख तत्व दिखाई देते हैं—

  1. सौंदर्य और कलात्मक उत्कृष्टता

  2. सामाजिक संदेश

  3. संस्कृति और इतिहास का सम्मान

  4. पर्यावरण एवं मानवता के प्रति जिम्मेदारी

उनके अनुसार, एक कलाकार का कार्य केवल सुंदर आकृति बनाना नहीं, बल्कि समाज को सोचने और सकारात्मक कदम उठाने के लिए प्रेरित करना भी है।


कला के प्रमुख माध्यम

मधुरेंद्र कुमार ने पारंपरिक और आधुनिक दोनों प्रकार के माध्यमों में कार्य किया है।

उनके प्रमुख कला माध्यम हैं—

  • रेत मूर्तिकला

  • मिट्टी की मूर्तिकला

  • कोयले की राख से मूर्तिकला

  • सीमेंट मूर्तिकला

  • फाइबर मूर्तिकला

  • प्लास्टर ऑफ पेरिस मूर्तिकला

  • मोम की मूर्तिकला

  • तांबे की मूर्तिकला

  • पीतल की मूर्तिकला

  • एल्युमिनियम की मूर्तिकला

  • मार्बल मूर्तिकला

  • ग्रेनाइट मूर्तिकला

  • प्लाईवुड पेंटिंग

  • थर्मोकोल मूर्तिकला

  • अनाज के दानों से कला

  • पत्तियों पर नक्काशी

  • फल एवं सब्जियों पर सूक्ष्म नक्काशी

  • चित्रकला

  • पोर्ट्रेट आर्ट

  • पुनर्चक्रित वस्तुओं से इंस्टॉलेशन आर्ट

उन्होंने धातु, फाइबर, सीमेंट, प्लास्टर ऑफ पेरिस, मार्बल और ग्रेनाइट से महापुरुषों, शहीदों, देवी-देवताओं, साधु-संतों, वैज्ञानिकों, अभिनेताओं, राजनेताओं और ऐतिहासिक व्यक्तियों की अनेक स्थायी मूर्तियां भी बनाई हैं।

उनकी बनाई अनेक प्रतिमाएं देश के अलग-अलग स्थानों, स्मारकों और समाधि स्थलों पर स्थापित की गई हैं।


पत्ती, फल और सब्जियों पर सूक्ष्म कला

रेत कला के अतिरिक्त मधुरेंद्र कुमार ने लीफ आर्ट में भी विशेष पहचान बनाई है।

वे पीपल और अन्य हरी पत्तियों पर अत्यंत सूक्ष्मता से महापुरुषों, देवी-देवताओं, राष्ट्रीय प्रतीकों, नेताओं और सामाजिक संदेशों की आकृतियां बनाते हैं।

इसके अतिरिक्त वे—

  • तरबूज

  • कद्दू

  • खीरा

  • अन्य फल

  • हरी सब्जियां

पर भी सूक्ष्म नक्काशी और पोर्ट्रेट तैयार करते हैं।

उपलब्ध विवरणों के अनुसार, उन्होंने 21,000 से अधिक पत्ती कलाकृतियां तैयार की हैं। इन्हीं कार्यों के आधार पर वर्ष 2026 में उनका नाम USA Book of World Records में दर्ज किया गया।


 

पुनर्चक्रण पर आधारित कला

मधुरेंद्र कुमार अनुपयोगी और प्रदूषण फैलाने वाली वस्तुओं को भी कला का रूप देते हैं।

उन्होंने कलाकृतियां बनाने के लिए—

  • खाली शराब की बोतलें

  • शराब के पाउच

  • गुटखा और तंबाकू के रैपर

  • सिगरेट के अवशेष

  • सनफिक्स के पैकेट

  • प्लास्टिक सामग्री

  • अन्य बेकार वस्तुएं

का उपयोग किया है।

इन कलाकृतियों के माध्यम से वे स्वच्छता, पुनर्चक्रण और सतत विकास का संदेश देते हैं। उनका प्रयास लोगों को यह समझाना है कि बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं को भी रचनात्मक ढंग से उपयोग किया जा सकता है।


कला के प्रमुख विषय

मधुरेंद्र कुमार की कला का दायरा बहुत व्यापक है। उनकी कलाकृतियां केवल धार्मिक या सजावटी विषयों तक सीमित नहीं हैं।

सामाजिक जागरूकता

उन्होंने निम्न विषयों पर अनेक कलाकृतियां बनाई हैं—

  • सामाजिक समानता

  • महिला सशक्तिकरण

  • बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ

  • भ्रूण हत्या रोकथाम

  • नारी उत्पीड़न के विरुद्ध संदेश

  • मानवाधिकार

  • महिला अधिकार

  • बाल मजदूरी उन्मूलन

  • जनसंख्या नियंत्रण

  • एचआईवी और एड्स जागरूकता

  • डॉक्टर्स डे

  • नर्स डे

  • अश्लीलता के विरुद्ध संदेश

  • हिंसा और शोषण के विरुद्ध जागरूकता

  • सामाजिक कुरीतियों का विरोध

पर्यावरण और जलवायु

उनकी कला में पर्यावरण संरक्षण प्रमुख स्थान रखता है।

उन्होंने निम्न विषयों पर कलाकृतियां बनाई हैं—

  • जलवायु परिवर्तन

  • ग्लोबल वार्मिंग

  • प्लास्टिक प्रदूषण

  • सिंगल-यूज प्लास्टिक प्रतिबंध

  • जल संरक्षण

  • जल-जीवन-हरियाली अभियान

  • गंगा संरक्षण

  • डॉल्फिन संरक्षण

  • वायु प्रदूषण

  • जल प्रदूषण

  • मृदा प्रदूषण

  • पशु-पक्षियों की सुरक्षा

  • लुप्तप्राय वन्यजीवों का संरक्षण

  • प्राकृतिक आपदाओं के प्रति जागरूकता

नशामुक्ति

उन्होंने नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों को दिखाने वाली कई कलाकृतियां तैयार की हैं।

इनमें प्रमुख विषय हैं—

  • शराबबंदी

  • धूम्रपान विरोध

  • गुटखा और तंबाकू विरोध

  • मद्यपान के दुष्प्रभाव

  • नशीले पदार्थों से होने वाली सामाजिक हानि

राष्ट्रीय और वैश्विक विषय

मधुरेंद्र कुमार की अनेक कलाकृतियां राष्ट्रीय एकता और विश्व शांति को समर्पित रही हैं।

प्रमुख विषय—

  • राष्ट्रभक्ति

  • शहीदों को श्रद्धांजलि

  • सर्वधर्म समभाव

  • राष्ट्रीय एकता

  • आतंकवाद विरोध

  • विश्व शांति

  • भारतीय वैज्ञानिक उपलब्धियां

  • भारतीय पर्यटन

  • सांस्कृतिक विरासत

  • लोकतंत्र और मतदान

  • सड़क सुरक्षा

धार्मिक और सांस्कृतिक विषय

उन्होंने भारतीय धर्म, संस्कृति और पौराणिक कथाओं पर आधारित अनेक विशाल रेत मूर्तियां बनाई हैं।

इनमें शामिल हैं—

  • भगवान बुद्ध

  • भगवान विष्णु और उनके अवतार

  • भगवान शिव

  • माता दुर्गा

  • माता काली

  • महावीर जयंती

  • गज और ग्राह का युद्ध

  • भीम और जरासंध का युद्ध

  • भगवान सूर्य

  • देवी-देवताओं की प्रतिमाएं

  • भरतनाट्यम

  • भारतीय शास्त्रीय नृत्य

  • भारतीय आध्यात्मिक परंपराएं

  • धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत


महापुरुषों और प्रेरणादायक व्यक्तियों पर कला

मधुरेंद्र कुमार ने अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यक्तियों की रेत, पत्ती, फल, मूर्ति और चित्रकला के माध्यम से आकृतियां तैयार की हैं।

इनमें प्रमुख हैं—

  • महात्मा गांधी

  • डॉ. भीमराव आंबेडकर

  • सरदार वल्लभभाई पटेल

  • भगत सिंह

  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस

  • जवाहरलाल नेहरू

  • डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

  • डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

  • डॉ. वर्गीज कुरियन

  • रवीन्द्रनाथ टैगोर

  • अटल बिहारी वाजपेयी

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

  • नीतीश कुमार

  • रतन टाटा

  • लता मंगेशकर

  • मेजर ध्यानचंद

  • सचिन तेंदुलकर

  • राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अन्य महापुरुष


बिहार में सैंड आर्ट के विकास में योगदान

परंपरागत रूप से भारत में रेत कला का संबंध ओडिशा और समुद्री तटीय क्षेत्रों से माना जाता रहा है। बिहार जैसे स्थलरुद्ध राज्य में सैंड आर्ट का कोई पुराना विकसित संस्थागत इतिहास नहीं था।

मधुरेंद्र कुमार ने नदी किनारे उपलब्ध बालू को कला का माध्यम बनाकर बिहार में सैंड आर्ट को नई पहचान दी।

उन्होंने—

  • पूर्वी चम्पारण में अरुणा नदी के किनारे शुरुआत की।

  • गंगा, गंडक, सोन और अन्य नदी तटों पर रेत मूर्तियां बनाईं।

  • बिहार के मेलों और महोत्सवों में सैंड आर्ट प्रस्तुत किया।

  • सरकारी जागरूकता अभियानों को रेत कला से जोड़ा।

  • युवाओं को रेत कला सीखने के लिए प्रेरित किया।

  • बिहार की कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया।

वर्ष 2012 में बिहार स्थापना दिवस के अवसर पर पटना के गांधी मैदान में महिला सशक्तिकरण विषय पर उनकी रेत कलाकृतियों का प्रदर्शन किया गया।

इसके बाद बिहार के सरकारी, सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों में रेत कला का प्रयोग तेजी से बढ़ा। आज बिहार के अनेक मेले, पर्यटन उत्सव और जागरूकता अभियान सैंड आर्ट को अपने कार्यक्रम का हिस्सा बनाते हैं।

इस कारण बिहार में आधुनिक रेत कला के विकास और लोकप्रियकरण में मधुरेंद्र कुमार का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय माना जाता है।


राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व

मधुरेंद्र कुमार ने 25 से अधिक देशों में आयोजित 75 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्ट महोत्सवों, कला प्रदर्शनियों और प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

उन्होंने जिन देशों में कला प्रदर्शन या प्रतियोगिताओं में भाग लिया, उनमें प्रमुख हैं—

  • संयुक्त राज्य अमेरिका

  • यूनाइटेड किंगडम

  • फ्रांस

  • जर्मनी

  • चीन

  • रूस

  • जापान

  • दक्षिण कोरिया

  • सिंगापुर

  • मलेशिया

  • वियतनाम

  • श्रीलंका

  • कंबोडिया

  • कनाडा

  • ऑस्ट्रेलिया

  • न्यूजीलैंड

  • स्विट्जरलैंड

  • थाईलैंड

  • म्यांमार

  • भूटान

  • बांग्लादेश

  • नेपाल

  • बेल्जियम

  • नीदरलैंड्स

  • डेनमार्क

  • स्पेन

  • इटली

  • ओमान

  • तुर्की

  • संयुक्त अरब अमीरात से जुड़े आयोजन

इन आयोजनों के माध्यम से उन्होंने भारतीय संस्कृति, धार्मिक विरासत, सामाजिक संदेश और बिहार की समकालीन कला को विश्व मंच पर प्रस्तुत किया।


प्रमुख राष्ट्रीय भागीदारी

भारत में मधुरेंद्र कुमार ने अनेक प्रमुख मेलों और महोत्सवों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है।

इनमें शामिल हैं—

  • हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला

  • बौद्ध महोत्सव

  • राजगीर महोत्सव

  • वैशाली महोत्सव

  • थावे महोत्सव

  • मंदार महोत्सव

  • केसरिया महोत्सव

  • पावापुरी महोत्सव

  • कुंडलपुर महोत्सव

  • मिथिला महोत्सव

  • मधुबनी महोत्सव

  • श्रावणी मेला

  • बिहार स्थापना दिवस समारोह

  • ओडिशा अंतरराष्ट्रीय रेत कला उत्सव

  • राष्ट्रीय किसान मेला

  • मतदाता जागरूकता कार्यक्रम

  • स्वच्छता और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम

बिहार सरकार के पर्यटन विभाग, जिला प्रशासन और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के निमंत्रण पर उन्होंने कई बार इन आयोजनों में भाग लिया।


ब्रांड एंबेसडर और जन-जागरूकता अभियानों में भूमिका

लोकसभा चुनाव मतदाता जागरूकता अभियान, 2019

लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान मधुरेंद्र कुमार ने विशाल और आकर्षक रेत कलाकृतियों के माध्यम से मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित किया।

उनकी कलाकृतियों में मतदान का महत्व, लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका और चुनाव में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया गया। इस योगदान के लिए उन्हें निर्वाचन आयोग से जुड़े मतदाता जागरूकता अभियान में ब्रांड एंबेसडर के रूप में सम्मान और जिम्मेदारी प्रदान की गई।

दैनिक भास्कर ब्रांड एंबेसडर, 2019

लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान बिहार में मतदाता जागरूकता बढ़ाने के लिए दैनिक भास्कर ने भी मधुरेंद्र कुमार को अपने अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाया।

उन्होंने रेत कला के माध्यम से नागरिकों से मतदान करने की अपील की।

बिहार विधानसभा चुनाव, 2020

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के अवसर पर मधुरेंद्र कुमार ने रेत कला के माध्यम से मतदाताओं को जागरूक किया।

उनके योगदान को देखते हुए निर्वाचन आयोग से जुड़े मतदाता जागरूकता अभियान में उन्हें ब्रांड एंबेसडर की भूमिका दी गई।

ढाका विधानसभा क्षेत्र, 2020

विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान पूर्वी चम्पारण के ढाका विधानसभा क्षेत्र में मतदाता जागरूकता अभियान को मजबूत बनाने के लिए उन्हें स्थानीय ब्रांड एंबेसडर बनाया गया।

स्वच्छ सर्वेक्षण, 2021–22

वर्ष 2021–22 में उन्होंने “स्वच्छ शहर–स्वच्छ गांव” विषय पर विशाल रेत कलाकृतियां बनाईं।

स्वच्छता और जन-जागरूकता के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान से जुड़े ब्रांड एंबेसडर की जिम्मेदारी प्रदान की गई।

सुधा डेयरी और COMFED, 2024

राष्ट्रीय किसान मेला 2024 के अवसर पर मधुरेंद्र कुमार ने ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों, किसानों और शुद्ध दुग्ध उत्पादों के महत्व पर रेत कलाकृतियां बनाईं।

बिहार राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड, COMFED और विक्रमशिला दुग्ध उत्पादक संघ से जुड़े अभियान में उन्हें ब्रांड एंबेसडर बनाया गया।


बिहार सरकार की योजनाओं के प्रचार में योगदान

वर्ष 2005 से 2025 के बीच मधुरेंद्र कुमार ने बिहार सरकार की अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक अभियानों को अपनी रेत कला के माध्यम से जनता तक पहुंचाया।

उन्होंने निम्न यात्राओं और अभियानों पर कला तैयार की—

  • न्याय यात्रा

  • विकास यात्रा

  • प्रवास यात्रा

  • निश्चय यात्रा

  • समाधान यात्रा

  • प्रगति यात्रा

  • समृद्धि यात्रा

उन्होंने सात निश्चय से संबंधित विषयों पर भी जन-जागरूकता फैलाई—

  1. आर्थिक हल, युवाओं को बल

  2. आरक्षित रोजगार, महिलाओं को अधिकार

  3. हर घर नल का जल

  4. हर घर तक पक्की गली और नालियां

  5. शौचालय निर्माण, घर का सम्मान

  6. हर घर बिजली लगातार

  7. स्वास्थ्य सुविधा और सिंचाई के लिए पानी

उन्होंने निम्न सामाजिक अभियानों पर भी रेत कला बनाई—

  • पूर्ण शराबबंदी

  • जल-जीवन-हरियाली

  • दहेज प्रथा उन्मूलन

  • बाल विवाह निषेध

  • हर घर गंगाजल

  • डैम परियोजनाएं

  • पर्यावरण संरक्षण

सात निश्चय के नए चरण से जुड़े विषयों में उन्होंने—

  1. दोगुना रोजगार–दोगुनी आय

  2. समृद्ध उद्योग–सशक्त बिहार

  3. कृषि में प्रगति–प्रदेश की समृद्धि

  4. उन्नत शिक्षा–उज्ज्वल भविष्य

  5. सुलभ स्वास्थ्य–सुरक्षित जीवन

  6. मजबूत आधार–आधुनिक विस्तार

  7. सबके लिए सम्मान–जीवन में आसानी

जैसे संदेशों को अपनी कलाकृतियों में प्रस्तुत किया।

इन अभियानों में लंबे समय तक योगदान देने के कारण उन्हें कई मंचों पर जनकल्याणकारी योजनाओं के “स्टार प्रचारक” के रूप में सम्मानित किया गया।


प्रमुख विश्व रिकॉर्ड

मधुरेंद्र कुमार के परिचय में 12 से अधिक विश्व रिकॉर्ड का उल्लेख मिलता है। उपलब्ध विवरणों में निम्न प्रमुख रिकॉर्ड शामिल हैं।

1. Supreme World Record Title, 2012

दिसंबर 2005 में पंजाब के बठिंडा में मधुरेंद्र कुमार ने राष्ट्रीय एकता और धार्मिक सद्भाव को समर्पित लगभग 45 फुट ऊंची और 100 फुट लंबी विशाल रेत मूर्ति तैयार की।

इस कलाकृति के निर्माण में—

  • 200 टन से अधिक रेत

  • लगभग 15 दिन

  • करीब 50 सहयोगी श्रमिक

लगे थे।

अक्टूबर 2012 में इस कलाकृति को Supreme World Record Title द्वारा विश्व रिकॉर्ड के रूप में प्रमाणित किया गया।

इसे राष्ट्रीय एकता और सर्वधर्म सद्भाव पर आधारित शुरुआती विशाल भारतीय सैंड स्कल्पचर्स में से एक माना गया।

2. United States Global Merit Record, 2014

जनवरी 2014 में पटना के गंगा दियारा क्षेत्र में आयोजित काइट फेस्टिवल के दौरान मधुरेंद्र कुमार ने गंगा डॉल्फिन संरक्षण पर विशाल रेत मूर्ति बनाई।

यह कलाकृति लगभग—

  • 20 फुट ऊंची

  • 50 मीटर लंबी

बताई गई।

“सेव डॉल्फिन” विषय पर बनी इस कलाकृति को United States Global Merit Record द्वारा प्रमाणित किया गया।

3. Prestigious Book of World Record, 2019

लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान चम्पारण में मधुरेंद्र कुमार ने मतदाता जागरूकता पर लगभग 35 फुट ऊंची और 55 फुट लंबी रेत मूर्ति तैयार की।

इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक भागीदारी और मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

इस कलाकृति को Prestigious Book of World Record में स्थान मिला।

4. Orient Book of World Record, 2022

अक्टूबर 2022 में छठ महापर्व के अवसर पर पटना मरीन ड्राइव पर मधुरेंद्र कुमार ने सात घोड़ों पर सवार भगवान सूर्य की विशाल रेत मूर्ति बनाई।

यह मूर्ति लगभग—

  • 38 फुट ऊंची

  • 55 फुट लंबी

थी।

इसे Orient Book of World Record द्वारा रिकॉर्ड के रूप में मान्यता दी गई।

5. Asian Book of World Record, 2022

नवंबर 2022 में ऐतिहासिक सोनपुर मेले में मधुरेंद्र कुमार ने गज-ग्राह युद्ध को दर्शाती लगभग 40 फुट ऊंची और 60 फुट लंबी रेत मूर्ति बनाई।

इस कलाकृति को एशिया की बड़ी रेत मूर्तियों में से एक माना गया और Asian Book of World Records में दर्ज किया गया।

6. European Book of World Record, 2023

जनवरी 2023 में बिहार के बोधगया में फल्गु नदी के तट पर मधुरेंद्र कुमार ने भगवान बुद्ध की विशाल रेत मूर्ति तैयार की।

यह मूर्ति लगभग—

  • 42 फुट ऊंची

  • 80 फुट लंबी

थी।

यह कलाकृति विश्व शांति, अहिंसा, सद्भाव और बौद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित थी।

इसे European Book of World Records में स्थान मिला।

7. Great Personalities of Bihar, 2023

12 दिसंबर 2023 को वरिष्ठ लेखक ललित कुमार द्वारा लिखित और प्रभात प्रकाशन से प्रकाशित पुस्तक “बिहार की महान हस्तियां” में मधुरेंद्र कुमार के जीवन और कला को विशेष स्थान दिया गया।

पुस्तक के पृष्ठ संख्या 190 और क्रम संख्या 17 पर उनका परिचय प्रकाशित किया गया।

इसे बिहार के कला क्षेत्र में उनके योगदान की महत्वपूर्ण साहित्यिक मान्यता माना गया।

8. London Book of World Records, 2025

अगस्त 2025 में 5,000 से अधिक अलग-अलग रेत कलाकृतियों के माध्यम से सामाजिक संदेश फैलाने के लिए मधुरेंद्र कुमार का नाम London Book of World Records में दर्ज किया गया।

उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन्हें ब्रिटिश संसद परिसर से जुड़े एक सम्मान समारोह में पदक और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

9. Asian Book of World Records, 2025

नवंबर 2025 में सोनपुर मेले में मधुरेंद्र कुमार ने गज-ग्राह युद्ध की पौराणिक कथा पर आधारित 50 अलग-अलग रेत प्रतिमाएं तैयार कीं।

इन प्रतिमाओं में भगवान विष्णु द्वारा सुदर्शन चक्र से ग्राह का वध करने की कथा प्रस्तुत की गई।

इस कार्य को Asian Book of World Records द्वारा रिकॉर्ड के रूप में प्रमाणित किया गया।

10. U-N Book of World Records, 2026

जनवरी 2026 में U-N Book of World Records नामक संस्था ने मधुरेंद्र कुमार को भगवान बुद्ध के जीवन पर आधारित 50 अलग-अलग रेत मूर्तियां बनाने के लिए सम्मानित किया।

इन मूर्तियों में सिद्धार्थ गौतम के जीवन के विभिन्न चरण और महापरिनिर्वाण से जुड़े दृश्य शामिल थे।

उन्हें प्रमाण पत्र, स्मृति चिह्न और पदक प्रदान किया गया।

11. USA Book of World Records, 2026

21,000 से अधिक अलग-अलग पत्ती कलाकृतियों के माध्यम से सामाजिक संदेश देने के लिए मधुरेंद्र कुमार का नाम USA Book of World Records में दर्ज किया गया।

उपलब्ध विवरणों के अनुसार, इस उपलब्धि के लिए उन्हें शेरिडन, अमेरिका से संबंधित सम्मान में पदक और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।

12. Forbes Book of World Records, 2026

जून 2026 में बिहार के सभी जिलों में सरकारी नीतियों, जनकल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक अभियानों से संबंधित 100 से अधिक रेत कलाकृतियां बनाने के लिए मधुरेंद्र कुमार का नाम Forbes Book of World Records में दर्ज होने का उल्लेख मिलता है।

इन कलाकृतियों में—

  • न्याय यात्रा

  • निश्चय यात्रा

  • समाधान यात्रा

  • प्रगति यात्रा

  • समृद्धि यात्रा

  • सरकारी विकास योजनाएं

  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

से संबंधित विषय शामिल थे।


प्रमुख राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान

कला, सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक योगदान के लिए मधुरेंद्र कुमार को अनेक राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं।

प्रमुख सम्मान इस प्रकार हैं—

  • राष्ट्रपति प्रशंसा और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा सम्मान, 2012

  • भारतीय ललित कला अकादमी पुरस्कार, 2014

  • गोल्ड सैंड आर्ट अवार्ड, 2014

  • निर्वाचन आयोग मतदाता जागरूकता ब्रांड एंबेसडर, 2019

  • बिहार विधानसभा चुनाव ब्रांड एंबेसडर, 2020

  • राजा रवि वर्मा राष्ट्रीय पुरस्कार, 2020

  • भारतीय संविधान सम्मान, 2022

  • तिलका मांझी राष्ट्रीय सम्मान, 2023

  • बिहार गौरव पुरस्कार, 2024

  • भारत गौरव सम्मान, 2025

  • राष्ट्रीय गौरव सम्मान, 2025

  • डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम भारतीय रत्न सम्मान, 2025

  • डॉ. भीमराव आंबेडकर राष्ट्रीय सम्मान, 2025

  • दानवीर कर्ण राष्ट्रीय पुरस्कार, 2026

  • राष्ट्रीय कला रत्न सम्मान, 2026

  • रवीन्द्रनाथ टैगोर राष्ट्रीय सम्मान, 2026

उन्हें इसके अतिरिक्त अनेक क्षेत्रीय और राष्ट्रीय सम्मान मिले हैं—

  • कला एवं शिल्प प्रतिस्पर्धा पुरस्कार, 2011

  • हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला सम्मान

  • शहीद सम्मान, 2015

  • स्वतंत्रता सेनानी राज बहादुर सिंह स्मृति पुरस्कार, 2016

  • आम्रपाली सम्मान, 2017

  • नई राहें सम्मान-पत्र, 2017

  • बिहार दर्पण सम्मान, 2017

  • उत्कृष्ट रेत कला पुरस्कार, 2017

  • विशिष्ट प्रतिभा सम्मान, 2017

  • वैशाली गणराज्य सम्मान, 2017

  • चम्पारण गौरव अवार्ड, 2018

  • राज्यस्तरीय युवा पुरस्कार, 2018

  • मिस्टर चम्पारण अवार्ड, 2018

  • सैंड आर्ट प्रेरणा पुरस्कार, 2019

  • प्राउड ऑफ बिहार अवार्ड, 2019

  • ग्लोबल पीस एंबेसडर अवार्ड, 2019

  • कोणार्क फेस्टिवल अवार्ड, 2019

  • डॉ. कलाम यूथ लीडरशिप कॉन्फ्रेंस अवार्ड, 2019

  • ग्लोबल बिहार एक्सीलेंस अवार्ड, 2019

  • मगध रत्न यूथ आइकॉन अवार्ड, 2019

  • चम्पारण रत्न, 2020

  • यंग इंडिया चेंज मेकर अवार्ड, 2020

  • इमर्जिंग स्टार अवार्ड, 2022

  • राजू श्रीवास्तव कॉमेडी अवार्ड, 2023

  • डॉ. कलाम युवा रत्न अवार्ड, 2024

  • लोक शिखर सम्मान, 2025

  • काव्य किरण सम्मान-पत्र, 2025

  • कर्ण पुरस्कार, 2025

  • राजगीर महोत्सव सम्मान

  • ग्लोबल आइकॉन ऑफ इंडिया सम्मान, 2025

समग्र रूप से उन्हें 100 से अधिक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किए जाने का उल्लेख मिलता है।


अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार और प्रमुख उपलब्धियां

मधुरेंद्र कुमार ने अनेक अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और सम्मान प्राप्त किए।

उनकी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों का क्रम इस प्रकार है—

  • विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला सम्मान, बिहार, 2008

  • श्री गढ़ीमाई मंदिर संचालन एवं विकास समिति सम्मान, नेपाल, 2009

  • नेपाल कैंसर रिलीफ सोसाइटी सम्मान, हेटौड़ा, 2010

  • इंटरनेशनल ग्रीन एंड क्लीन सोनपुर सम्मान, 2011

  • भारत-नेपाल मैत्री संबंध सम्मान, नेपाल, 2012

  • सैंड पैगोडा फेस्टिवल में भारत का प्रतिनिधित्व, म्यांमार, 2013

  • फ्रेंडशिप रिलेशन ऑफ इंडिया एंड अमेरिका पुरस्कार, 2013

  • दक्षिण एशियाई समकालीन कला सांत्वना पुरस्कार, बांग्लादेश, 2014

  • इंटरनेशनल गोल्ड सैंड आर्ट अवार्ड, भूटान, 2014

  • विश्व रेत मूर्तिकला चैम्पियनशिप, फ्रांस, 2014

  • अंतरराष्ट्रीय रेत मूर्तिकला महोत्सव सम्मान, जर्मनी, 2014

  • विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला सम्मान, देवघर, 2015

  • अंतरराष्ट्रीय सैंड स्कल्पचरिंग चैम्पियनशिप, चीन, 2015

  • अंतरराष्ट्रीय रेत मूर्तिकला महोत्सव, ग्लासगो, यूनाइटेड किंगडम, 2015

  • अंतरराष्ट्रीय सैंड एनीमेशन प्रतियोगिता पदक, सिंगापुर, 2016

  • सैंड स्कल्पचर फेस्टिवल में भारत का प्रतिनिधित्व, जापान, 2016

  • इंडो-नेपाल इंटरनेशनल गोल्डन सैंड मास्टर अवार्ड, नेपाल, 2016

  • अंतरराष्ट्रीय रेत मूर्तिकला महोत्सव में भारत का प्रतिनिधित्व, मलेशिया, 2017

  • ब्लोखस अंतरराष्ट्रीय रेत मूर्तिकला महोत्सव, डेनमार्क, 2017

  • बर्लिन अंतरराष्ट्रीय सैंड स्कल्पचर फेस्टिवल पुरस्कार, जर्मनी, 2017

  • टोटोरी अंतरराष्ट्रीय रेत कला उत्सव में भारत का प्रतिनिधित्व, जापान, 2018

  • अंतरराष्ट्रीय रेत मूर्तिकला महोत्सव पुरस्कार, मॉस्को, 2018

  • USF वर्ल्ड चैम्पियनशिप खिताब, बर्लिन, 2018

  • वर्ल्ड मास्टर सैंड स्कल्पचर चैम्पियनशिप, इटली, 2018

  • शेवेनिंगेन अंतरराष्ट्रीय रेत मूर्तिकला प्रतियोगिता पदक, नीदरलैंड्स, 2018

  • आठवां अंतरराष्ट्रीय रेत कला उत्सव सम्मान, ओडिशा, 2018

  • विश्व रेत मूर्तिकला चैम्पियनशिप, मॉस्को, 2019

  • कोरिया सैंड स्कल्पचर पुरस्कार, बुसान, दक्षिण कोरिया, 2019

  • वैश्विक गांधी शांति सम्मेलन सम्मान, नई दिल्ली, 2019

  • वैश्विक शांति राजदूत पुरस्कार, 2019

  • USF विश्व चैम्पियनशिप, बर्लिन, 2019

  • अंतरराष्ट्रीय रेत प्रतिमा प्रतियोगिता पदक, जापान, 2019

  • नौवां अंतरराष्ट्रीय रेत कला महोत्सव विजेता, ओडिशा, 2019

  • इंटरनेशनल कोणार्क फेस्टिवल सम्मान, 2019

  • ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनी सैंड मास्टर अवार्ड, 2020

  • सैंड मैजिशियन अवार्ड, हेटौड़ा, नेपाल, 2020

  • वरिष्ठ कलाकार स्वर्ण पुरस्कार, उत्तर प्रदेश, 2020

  • ग्लोबल गांधी पीस कॉन्फ्रेंस पुरस्कार, श्रीलंका, 2020

  • अंतरराष्ट्रीय बाल फिल्म महोत्सव कला पुरस्कार, 2020

  • दसवां अंतरराष्ट्रीय रेत कला उत्सव सम्मान, ओडिशा, 2020

  • ब्लेंकेनबर्ग अंतरराष्ट्रीय रेत मूर्तिकला महोत्सव, बेल्जियम, 2021

  • विश्व रेत कला महोत्सव सम्मान, जापान, 2021

  • वरिष्ठ कलाकार स्वर्ण पुरस्कार, उत्तर प्रदेश, 2021

  • सैंड लेक इंटरनेशनल सैंड स्कल्पचर प्रतियोगिता, चीन, 2021

  • ग्यारहवां अंतरराष्ट्रीय रेत कला उत्सव सम्मान, ओडिशा, 2021

  • डच सैंड स्कल्पचर फेस्टिवल, थॉर्न, नीदरलैंड्स, 2022

  • बारहवां अंतरराष्ट्रीय रेत कला उत्सव सम्मान, ओडिशा, 2022

  • भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सम्मान, वीरगंज, नेपाल, 2023

  • अंतरराष्ट्रीय रेत मूर्तिकला प्रतियोगिता पुरस्कार, चीन, 2023

  • विश्व शांति सम्मान, गयाजी, 2023

  • अंतरराष्ट्रीय रेत मूर्तिकला चैम्पियनशिप, स्पेन, 2023

  • इंटरनेशनल सैंड स्कल्पचर चैम्पियनशिप, डेनमार्क, 2023

  • तेरहवां अंतरराष्ट्रीय रेत कला उत्सव सम्मान, ओडिशा, 2023

  • वर्ल्ड सैंड आर्ट चैम्पियनशिप पुरस्कार, मॉस्को, रूस, 2023

  • सैंड वर्ल्ड फेस्टिवल अवार्ड, ट्रावमुंडा, जर्मनी, 2024

  • भारत-नेपाल बेटी-रोटी संबंध सम्मान, रक्सौल, 2024

  • मस्कट महोत्सव सैंड स्कल्पचर सम्मान, ओमान, 2024

  • मेलबर्न इंटरनेशनल सैंड स्कल्प्टिंग सम्मान, ऑस्ट्रेलिया, 2024

  • अंतरराष्ट्रीय डॉ. कलाम युवा रत्न सम्मान, कोलकाता, 2024

  • अंतरराष्ट्रीय रेत मूर्तिकला प्रतियोगिता चैम्पियनशिप, जर्मनी, 2025

  • सोलो सैंड मूर्तिकला चैम्पियनशिप पदक, संयुक्त राज्य अमेरिका, 2025

  • द्वितीय इंटरनेशनल आर्ट एग्जीबिशन चैम्पियनशिप, काठमांडू, नेपाल, 2025

  • अंतरराष्ट्रीय रेत मूर्तिकला महोत्सव, तुर्की, 2025

  • बेस्ट सैंड स्कल्पचर आर्टिस्ट ऑफ द ईयर, थिम्पू, भूटान, 2025

  • ग्लोबल आइकॉन ऑफ इंडिया अवार्ड, 2025

  • कनाडा सैंड स्कल्पचर टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व, 2026


ओडिशा अंतरराष्ट्रीय रेत कला उत्सव में भागीदारी

मधुरेंद्र कुमार ने ओडिशा के चंद्रभागा तट पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय रेत कला उत्सव में लगातार कई वर्षों तक भाग लिया।

उपलब्ध विवरणों के अनुसार, वे वर्ष 2018 से 2023 तक लगातार छह बार इस आयोजन में शामिल हुए।

वर्ष 2019 के आयोजन में उन्हें विजेता के रूप में सम्मानित किए जाने का उल्लेख मिलता है। इसी अवसर पर प्रसिद्ध भारतीय रेत कलाकार पद्मश्री सुदर्शन पटनायक ने उनकी कला की सराहना की और उन्हें पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र तथा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।


विश्व स्तर पर भारतीय संस्कृति का प्रचार

मधुरेंद्र कुमार की रेत कलाकृतियों में भारतीय संस्कृति, धर्म, ऐतिहासिक व्यक्तियों और सामाजिक मूल्यों का विशेष स्थान है।

उन्होंने विदेशों में आयोजित कार्यक्रमों में—

  • भगवान बुद्ध

  • महात्मा गांधी

  • भारतीय धार्मिक परंपराएं

  • भारतीय पर्यटन

  • विश्व शांति

  • पर्यावरण संरक्षण

  • भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक

  • सांस्कृतिक विरासत

जैसे विषय प्रस्तुत किए।

उनके कार्यों को बेल्जियम, अमेरिका, नीदरलैंड्स, यूनाइटेड किंगडम और अन्य देशों में भारतीय कला और पर्यटन के प्रचार से भी जोड़ा गया।


मीडिया में पहचान

मधुरेंद्र कुमार की कला और जीवन संघर्ष को भारत और विदेश के विभिन्न समाचार माध्यमों में स्थान मिला है।

उनकी उपलब्धियों को प्रकाशित या प्रसारित करने वाले प्रमुख मीडिया संस्थानों में शामिल हैं—

  • द टाइम्स ऑफ इंडिया

  • द हिन्दू

  • द टेलीग्राफ

  • नवभारत टाइम्स

  • दैनिक भास्कर

  • हिन्दुस्तान

  • दैनिक जागरण

  • प्रभात खबर

  • अमर उजाला

  • न्यूज़18

  • ईटीवी भारत

  • दूरदर्शन

  • जी न्यूज

  • एबीपी न्यूज

  • आजतक

  • न्यूज नेशन

  • टीवी9 भारतवर्ष

  • पंजाब केसरी

  • न्यूज24

  • News4Nation

  • ANI

  • IANS

उनकी कला से जुड़ी तस्वीरें और समाचार डिजिटल मीडिया तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर भी व्यापक रूप से साझा किए गए हैं।


वैश्विक कलाकार के रूप में पहचान

उपलब्ध विवरणों के अनुसार, जून 2025 में London Book of World Records से जुड़े एक वैश्विक सर्वेक्षण में मधुरेंद्र कुमार को लगभग 95 प्रतिशत अनुमोदन रेटिंग प्राप्त हुई।

इस विवरण में उन्हें अमेरिका, चीन, रूस और कनाडा सहित कई देशों के कलाकारों के बीच प्रमुख स्थान मिलने का उल्लेख किया गया है।

नेपाल में उन्हें “इंडो-नेपाल इंटरनेशनल गोल्डन सैंड मास्टर अवार्ड” और भूटान में “बेस्ट सैंड स्कल्पचर आर्टिस्ट ऑफ द ईयर” जैसे सम्मान प्राप्त हुए।


निजी और वैवाहिक जीवन

मधुरेंद्र कुमार विवाहित हैं। उनकी पत्नी दीपिका कुमारी ने उनके संघर्ष और कला साधना के दौरान महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

कठिन आर्थिक परिस्थितियों, लगातार यात्राओं, कला प्रदर्शनियों और सामाजिक अभियानों के बीच उनकी पत्नी ने परिवार और उनके कला संबंधी सपनों को संभालने में सक्रिय भूमिका निभाई।

दम्पति के दो बच्चे हैं। मधुरेंद्र अपने परिवार को अपने जीवन और रचनात्मक कार्यों का महत्वपूर्ण प्रेरणा-स्रोत मानते हैं।


वर्तमान कलात्मक गतिविधियां

मधुरेंद्र कुमार बिहार के पटना, भागलपुर, मुंगेर और अन्य स्थानों के गंगा तटों पर समय-समय पर अपनी रेत कला का प्रदर्शन करते हैं।

वे सामाजिक घटनाओं, राष्ट्रीय दिवसों, धार्मिक पर्वों, प्राकृतिक आपदाओं और जन-जागरूकता अभियानों पर तुरंत कलाकृतियां तैयार करते हैं।

उनकी कला में अक्सर वर्तमान घटनाओं की प्रतिक्रिया दिखाई देती है। किसी राष्ट्रीय उपलब्धि, सामाजिक समस्या या पर्यावरणीय संकट पर वे रेत, पत्ती या अन्य माध्यम से संदेश देने वाली कलाकृति बनाते हैं।


प्रशिक्षण और कार्यशालाएं

मधुरेंद्र कुमार ने सैंड आर्ट, लीफ आर्ट और मूर्तिकला को लोकप्रिय बनाने के लिए अनेक प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की हैं।

उन्होंने भारत और पड़ोसी देशों में—

  • छात्रों को सैंड आर्ट की तकनीक सिखाई।

  • कला प्रतियोगिताओं में मार्गदर्शन दिया।

  • मेलों और उत्सवों में लाइव प्रदर्शन किए।

  • बच्चों को सामाजिक विषयों पर कला बनाने के लिए प्रेरित किया।

  • अल्पकालिक और परियोजना आधारित प्रशिक्षण दिया।

वर्ष 2015 के आसपास उन्होंने कला सीखने वाले विद्यार्थियों को व्यावसायिक रूप से प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से पहल शुरू की।

उनका उद्देश्य गुरुकुल की अवधारणा पर आधारित ऐसा कला एवं संस्कृति केंद्र विकसित करना है, जहां भारत और विदेश के विद्यार्थी नियमित तथा अल्पकालिक पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।


भविष्य की योजनाएं

निःशुल्क सैंड आर्ट अकादमी

मधुरेंद्र कुमार का सबसे बड़ा सपना ग्रामीण और गरीब परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों के लिए एक निःशुल्क कला अकादमी स्थापित करना है।

वे चाहते हैं कि आर्थिक अभाव के कारण किसी प्रतिभाशाली बच्चे की पढ़ाई या कला न रुके और किसी विद्यार्थी को हॉस्टल की फीस न दे पाने के कारण बरामदे में न सोना पड़े।

मधुरेंद्र सैंड आर्ट इंस्टीट्यूट

वे बिहार में “मधुरेंद्र सैंड आर्ट इंस्टीट्यूट” की स्थापना करना चाहते हैं।

इस संस्थान में प्रशिक्षण के प्रमुख विषय होंगे—

  • सैंड आर्ट

  • सैंड स्कल्पचर

  • लीफ आर्ट

  • फ्रूट आर्ट

  • वेजिटेबल कार्विंग

  • मूर्तिकला

  • सामाजिक इंस्टॉलेशन आर्ट

  • पुनर्चक्रण आधारित कला

  • 3D सैंड आर्ट

बच्चों के लिए पाठ्यक्रम

वे बच्चों और युवाओं के लिए सैंड आर्ट, लीफ आर्ट और फ्रूट आर्ट का व्यवस्थित पाठ्यक्रम तैयार करना चाहते हैं।

इस पाठ्यक्रम में—

  • कला के मूल सिद्धांत

  • रेत की पहचान

  • डिजाइन तैयार करना

  • संरचना और संतुलन

  • सूक्ष्म नक्काशी

  • प्राकृतिक सामग्री का उपयोग

  • पर्यावरणीय जिम्मेदारी

  • सामाजिक विषयों की प्रस्तुति

जैसे विषय शामिल किए जाएंगे।

सैंड आर्ट पर पुस्तक

मधुरेंद्र कुमार सैंड आर्ट के इतिहास, तकनीक, अनुभव और सामाजिक उपयोग पर एक पुस्तक प्रकाशित करना चाहते हैं।

इस पुस्तक का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को रेत कला का व्यवस्थित ज्ञान उपलब्ध कराना होगा।

भारतीय संस्कृति का वैश्विक विस्तार

वे 3D सैंड आर्ट, पत्ती कला और आधुनिक तकनीकों का मिश्रण करके भारतीय संस्कृति, पौराणिक कथाओं और लोककलाओं को दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचाना चाहते हैं।

पर्यावरण के लिए वैश्विक अभियान

उनकी योजना विश्व के विभिन्न समुद्री और नदी तटों पर पर्यावरण संरक्षण, ग्लोबल वार्मिंग, जल बचाओ और पृथ्वी बचाओ जैसे संदेशों पर कलाकृतियां बनाने की है।


मधुरेंद्र कुमार की कला का महत्व

मधुरेंद्र कुमार की कला कई कारणों से महत्वपूर्ण है।

पहला, उन्होंने बिहार जैसे स्थलरुद्ध राज्य में नदी की रेत को विश्वस्तरीय कला का माध्यम बनाया।

दूसरा, उन्होंने रेत कला को केवल सुंदर मूर्तियों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जन-जागरूकता का माध्यम बनाया।

तीसरा, उन्होंने गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले युवाओं के लिए प्रेरणा प्रस्तुत की।

चौथा, उन्होंने रेत के साथ-साथ पत्तियों, फलों, सब्जियों, अनाज, धातु, पत्थर और बेकार वस्तुओं को भी कला का रूप दिया।

पांचवां, उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय संस्कृति तथा बिहार की कला को पहचान दिलाई।


प्रेरणादायक जीवन संदेश

मधुरेंद्र कुमार का जीवन यह साबित करता है कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों, महंगे संस्थानों या संपन्न परिवारों की संपत्ति नहीं होती।

एक गरीब किसान परिवार का बच्चा, जिसने—

  • भैंस और बकरियां चराईं,

  • दही बेचा,

  • टोकरियां बुनीं,

  • सब्जियां बेचीं,

  • होटल में काम किया,

  • दीवारों पर पेंटिंग की,

  • नाइट गार्ड की नौकरी की,

  • कॉलेज के बरामदे में रातें बिताईं,

वही बच्चा आगे चलकर दुनिया के 25 से अधिक देशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाला कलाकार बना।

उनकी यात्रा मेहनत, संघर्ष, आत्मविश्वास और निरंतर अभ्यास की शक्ति का उदाहरण है।


निष्कर्ष

मधुरेंद्र कुमार केवल एक रेत कलाकार नहीं, बल्कि कला के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन का प्रयास करने वाले रचनात्मक व्यक्तित्व हैं।

उनकी कलाकृतियों में एक ओर भारतीय संस्कृति और इतिहास दिखाई देता है, तो दूसरी ओर पर्यावरण, मानवाधिकार, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की चिंता भी दिखाई देती है।

उन्होंने नदी किनारे की साधारण बालू को अपना पहला कैनवास बनाया और उसी बालू के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की। उन्होंने साबित किया कि कला स्थायी वस्तु में ही नहीं, बल्कि कुछ समय बाद मिट जाने वाली रेत की मूर्ति में भी गहरा और स्थायी संदेश छोड़ सकती है।

उनकी कला तकनीकी दक्षता, मौलिक सोच, सामाजिक उत्तरदायित्व, सांस्कृतिक मूल्यों और मानवीय संवेदना का अद्भुत संगम है।

आज मधुरेंद्र कुमार भारतीय समकालीन कला जगत में एक ऐसे बहु-माध्यम कलाकार के रूप में पहचाने जाते हैं, जिनकी प्रत्येक रचना समाज को सोचने, जागरूक होने और सकारात्मक बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है।

उनकी जीवन यात्रा का सबसे बड़ा संदेश है—

साधन कम हो सकते हैं, लेकिन संकल्प बड़ा हो तो नदी किनारे की साधारण रेत भी व्यक्ति को विश्व मंच तक पहुंचा सकती है।


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